Lalleshwari

  1. थल-थल में बसता है शिव ही,
    भेद न कर क्या हिंदू-मुसलमां।
    ज्ञानी है तो स्वयं को जान,
    वही है साहिब से पहचान॥
  2. आई सीधी राह से, गई न सीधी राह।
    सुषुम-सेतु पर खड़ी थी, बीत गया दिन आह!
    जेब टटोली, कौड़ी न पाई।
    माझी को दूँ, क्या उत्तराई?
  3. खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
    न खाकर बनेगा अहंकारी।
    सम खा तभी होगा समभावी,
    खुलेगी साँकल बंद द्वार की।
  4. रस्सी कच्चे धागे की, खींच रही मैं नाव।
    जाने कब सुन मेरी पुकार, करें देव भवसागर पार।
    पानी टपके कच्चे सकोरे, व्यर्थ प्रयास हो रहे मेरे।
    जी में उठती रह-रह हूक, घर जाने की चाह है घेरे॥
Shopping Basket
error: Content is protected !!